दिनांक 05 जुलाई 2026 को गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ एवं अभिनय नाटक संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में राम नरेश त्रिपाठी सभागार, सुल्तानपुर में "हनुमान जी की लंका यात्रा" का भव्य नाट्य मंचन आयोजित किया गया। श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड पर आधारित इस प्रस्तुति में श्रद्धा, पराक्रम, भक्ति एवं आधुनिक मंचीय तकनीकों का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ के समन्वयक श्री प्रभाकर सक्सेना ने बताया कि इस नाट्य प्रस्तुति का उद्देश्य समाज में सोई हुई भाव-संवेदनाओं को जागृत करना तथा युग ऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के जीवन-दर्शन एवं सूत्रों को जन-जन तक पहुंचाना है।
हनुमान जी की भूमिका में अजय देवल ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुरसा, सिंहिका एवं लंकिनी के साथ युद्ध, अशोक वाटिका विध्वंस तथा लंका दहन के दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहे और पूरे सभागार में उत्साह एवं जयघोष का वातावरण बन गया।
डॉ. संजय श्रीवास्तव ने रावण की भूमिका में अहंकार के विनाश का प्रभावशाली चित्रण किया। संध्या श्रीवास्तव ने माता सीता के विरह एवं धैर्य को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। गीता श्रीवास्तव ने मंदोदरी तथा शोभनाथ रावत ने विभीषण की भूमिका का उत्कृष्ट निर्वहन किया। वहीं सीमा रानी ने त्रिजटा माता के रूप में यह संदेश दिया कि राक्षस कुल में भी रामभक्ति का प्रकाश संभव है।
ओमसिंह, अरुण त्यागी एवं जुनेद राईन द्वारा प्रस्तुत दोहों एवं चौपाइयों के सुमधुर गायन ने श्रीरामचरितमानस के भावों को जीवंत कर दिया और दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति से जोड़ दिया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं एवं दर्शकों ने खड़े होकर सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ किया, जिससे पूरा सभागार भक्ति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से गुंजायमान हो उठा।
सुल्तानपुर गायत्री परिवार के जिला समन्वयक डॉ. सुधाकर सिंह ने सभी कलाकारों, अतिथियों एवं दर्शकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के मुख्य यजमान श्री सुरेश सोनी सपत्नीक, श्री नवीन अग्रवाल, श्री पंकज अग्रवाल एवं श्री सच्चिदानंद सिंह की विशेष भूमिका रही। भोजन प्रसाद की व्यवस्था श्री नवीन अग्रवाल द्वारा की गई।
यह भव्य सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आयोजन निकट भविष्य में आयोजित होने वाली रामलीला के लिए भी प्रेरणादायक एवं उत्साहवर्धक सिद्ध हुआ तथा उपस्थित जनसमूह ने ऐसे आयोजनों को समाज में संस्कार जागरण का प्रभावी माध्यम बताया।
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