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बलरामपुर में शिक्षक गरिमा कार्यशाला सम्पन्न, शिक्षकों को समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार बताया गया

बलरामपुर में शिक्षक गरिमा कार्यशाला सम्पन्न, शिक्षकों को समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार बताया गया बलरामपुर में शिक्षक गरिमा कार्यशाला सम्पन्न, शिक्षकों को समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार बताया गया

बलरामपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रकोष्ठ, बलरामपुर द्वारा एमएलके पीजी कॉलेज के सभागार में शिक्षक गरिमा कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यशाला में जनपद के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ देव पूजन, दीप प्रज्ज्वलन एवं गुरु वंदना के साथ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में एनसीसी के कर्नल अरविंद प्रताप सिंह पटवाल, विशिष्ट अतिथि प्राचार्य प्रो. जे. पी. पाण्डेय, प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ संयोजक जयप्रकाश वर्मा, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के जिला संयोजक गुलाबचंद भारती, गायत्री शक्तिपीठ अयोध्या के राम केवल बाबू तथा उप प्रबंध ट्रस्टी डॉ. के. के. राणा उपस्थित रहे।

प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ संयोजक श्री जयप्रकाश वर्मा ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि "शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माता होता है।" उन्होंने शिक्षकों से भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, चरित्र निर्माण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आह्वान किया तथा अपने दायित्वों का निष्ठा, समर्पण एवं आदर्श आचरण के साथ निर्वहन करने का संदेश दिया।

एमएलके पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. जे. पी. पाण्डेय ने शिक्षक की गरिमा एवं उच्च शिक्षा के आदर्शों पर अपने विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि कर्नल अरविंद प्रताप सिंह पटवाल ने कहा कि उच्च शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों में विनम्रता, अनुशासन एवं नैतिकता का समावेश भी आवश्यक है।

कार्यशाला का संचालन मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. स्वदेश भट्ट एवं श्री दिलीप कुमार श्रीवास्तव द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सतीश चन्द्र मिश्रा, सुरेश चन्द्र वर्मा, सुनील वर्मा, लोकेश श्रीवास्तव, नीलम वर्मा, अर्चना श्रीवास्तव, पूनम श्रीवास्तव एवं रानी मिश्रा गुप्ता सहित गायत्री परिवार के अनेक परिजन, शिक्षक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने बताया कि शिक्षक गरिमा कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं युग निर्माण की भावना को सुदृढ़ करना तथा शिक्षा को समाज एवं राष्ट्र निर्माण का प्रभावी माध्यम बनाना है।

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