झांसी। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में श्री गायत्री शक्तिपीठ, आंतिया तालाब, झांसी में शिक्षक गरिमा शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों, शिक्षाविदों एवं गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ ज्योति विद्यार्थी एवं धर्मेंद्र शर्मा द्वारा प्रस्तुत गुरु वंदना से हुआ।
शांतिकुंज, हरिद्वार से पधारे श्री रामयश तिवारी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के श्रेष्ठ गुणों को पहचानकर उनकी प्रतिभा को जागृत करना तथा उन्हें श्रेष्ठ मानव बनाना है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं प्रांतीय संयोजक डॉ. हरगोविंद यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति ही विश्व संस्कृति का आधार बनने की क्षमता रखती है तथा शिक्षक इस परिवर्तन के सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
मुख्य अतिथि श्री शंभूनाथ सिंह ने शिक्षकों से विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, संस्कार एवं चरित्र निर्माण की भावना विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज के लिए जिम्मेदार एवं संवेदनशील नागरिक तैयार करना भी है।
कार्यक्रम में पीड़ी साहू, रमेश सक्सेना, रोकेश कटारे, हरिकृष्ण पुरोहित, पीयूष अग्रवाल, संजीव खरे, पंकज शर्मा, आसराम कुशवाहा, किरण श्रीवास्तव, उषा गंगवार एवं संजना गुप्ता सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं गायत्री परिवार के परिजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संयोजन श्रवण कुमार दीक्षित ने किया तथा संचालन राजेन्द्र द्विवेदी द्वारा किया गया। अंत में देवी दयाल यादव ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
शिविर का उद्देश्य शिक्षकों में भारतीय संस्कृति, नैतिक शिक्षा, संस्कार एवं व्यक्तित्व निर्माण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र निर्माण को सशक्त बनाना रहा।
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